रीवा संभाग में गेहूं उत्पादन 4.19 लाख एमटी अनुमानित है। सतना और रीवा आगे हैं, जबकि मऊगंज और सिंगरौली पीछे। पंजीकृत किसानों में से केवल आधे ही समर्थन मूल्य पर उपज बेच पाएंगे।
सतना-मैहर में चना, मसूर और तुअर उपार्जन के लिए 2672 एमटी लक्ष्य तय हुआ। 54 हजार बारदाने उपलब्ध हैं और 80 गठान और आएंगे। किसानों के लिए आठ उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं।
सतना में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी तेज है, लेकिन परिवहन सुस्त पड़ने पर नागरिक आपूर्ति निगम ने ठेकेदार पर 32.88 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई।
सतना–मैहर में धान उपार्जन केंद्रों पर तौलाई, गिनाई, सिलाई और पल्लेदारी के नाम पर किसानों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मानक से अधिक तौल, धान में मिलावट, भुगतान में देरी और सम्मान निधि की कथित चौथ वसूली ने सरकारी खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है। कई खरीदी केन्द्रों में किसानों को तीन-तीन दिन तक तौल के लिए जागना पड़ रहा है। कहीं तौल कांटे खराब हैं तो कहीं बारदाने नहीं हैं। सेमरिया क्षेत्र में नाराज किसानों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
सतना-मैहर जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं बिना केंद्र स्थापित हुए खरीदी की तैयारी तो कहीं बिना तौल और मानक से अधिक वजन की शिकायतें मिली हैं। वायरल वीडियो के बीच कलेक्टर ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सतना और मैहर जिले के अमरपाटन व मझगवां उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य में खरीदी जा रही धान की बोरियों में कंकड़-पत्थर मिलने से हड़कंप। मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के औचक निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं, किसानों को वापस भेजा गया।
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। सतना और मैहर जिलों में लक्ष्य से अधिक खरीदी गई 2505 क्विंटल मूंग का 56 लाख रुपए भुगतान अटका हुआ है। प्रदेशभर में 1.38 लाख किसानों के 3398 करोड़ रु. रुके हैं। भुगतान न मिलने से किसान कर्ज में डूबकर खाद तक उधारी पर लेने को मजबूर हैं।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर है! केंद्र सरकार ने राज्य में मूंग और उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की मंजूरी दे दी है।






















